लोकल ईश्यू

विरोधी हवाओं को धता बताकर भाया ने सिद्व की अपने नाम की प्रमाणिकता

ललित मोहन खंडेलवाल

बारां, 22 नवंबर। लंबे अरसे से सुनियोजित तरीके से चल रही अफवाहों की चैन को तोडते हुए राज्य के खान, गोपालन पेट्रोलियम मंत्री प्रमोद जैन भाया ने एक बार फिर अपनी श्रेष्ठता सिद्व कर अपने नाम की प्रमाणिकता को कायम रखा और नवगठित मंत्री मण्डल में यथास्थान बनाते हुए सभी विरोधियों की जुबां पर ताले लगा दिए।
एक वर्ष से चल रही लंबी चर्चा कि अगर मंत्री मण्डल परिवर्तन हुआ तो भाया जा सकते है या फिर काफी विरोध के कारण मंत्रालय का बदलाव हो सकता है। इन चर्चाओं के दौरान कई भाया प्रेमियों के दिलों पर भी चोट लगती थी जब कांग्रेस तथा भाजपा से जुडे उनके परम्परागत विरोधी आए दिन अफवाहें फैलाते रहे कि बिल्कुल जाएंगे, भाया जाएंगे। लेकिन प्रमोद जैन भाया ने इस बार वह पहले वाली गलती नही की ओर समय रहते केन्द्रीय नेतृत्व तक अपनी श्रेष्ठता सिद्व करने में कोई कसर नही छोडी।
घोर विरोधी रहे कुछ विधायकों के विरोध की भी परवाह नही करते हुए उन्हें बडी शालीनता के साथ जवाब देकर भाया ने अपना तीन वर्ष का कार्यकाल जिन उपलब्धियों के साथ हासिल किया वह राज्य के मुख्यमंत्री व कांग्रेस के उच्च नेतृत्व तक छुपा हुआ नही है। ठण्डे बस्ते खान मंत्रालय को बाहर निकालकर राज्य सरकार के लिए सबसे बडे खजाने की चाबी वाला विभाग बताते हुए अपने कार्यकाल में जिस कदर खान मंत्रालय से राजस्व अर्जित किया यह पिछले लंबे सत्ता के कार्यकाल का सबसे बेहतर उदाहरण रहा।
लगातार चर्चा थी कि पूर्व में सचिन पायलट के खेमे से मंत्री बने प्रमोद भाया के अचानक गहलोत खेमें में चले जाने से पायलट गुट की नाराजगी का खामियाजा भाया को उठाना पड सकता है और कई विरोधी यह मानकर भी चल रहे थे लेकिन कल हुए मंत्री मण्डल विस्तार में भाया ने कांग्रेस संगठन पर निष्चित रूप से अपनी मजबूत पकड का अहसास करवाते हुए अपनी श्रेष्ठता को कायम रखा वही पूर्व में मिले खान, पेट्रोलियम एवं गोपालन मंत्रालय की जवाबदेही को भी अपने पक्ष में सुरक्षित रखा। इसलिए आमतौर पर कहा जाता है कि भाया रे भाया, कोई नही जान पाया तेरी माया।

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