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विचार-आलेख

भारत को अब ‘पूरी तरह लोकतांत्रिक’ देश नहीं माना गया है.-उर्मिलेश

दुनिया के 162 देशों के Human Freedom Index में भारत 111 वें स्थान पर है. पहले 94 वें स्थान पर था. महज एक साल में 94 से 111 पर जा गिरा. Press Feedom के Global Index में हम 142/180 पर जा पहुंचे हैं. लोकतंत्र की स्थिति और दशा के Global Democracy Index में पिछले साल हमारा पतन जितना भयावह है उतना ही शर्मनाक! Democracy Index में भारत को अब ‘पूरी तरह लोकतांत्रिक’ देश नहीं माना गया है. हमें ‘दोषपूर्ण लोकतंत्र’ (Flawed Democracy)की श्रेणी में रखा गया है. सन् 2014 में भारत इस इंडेक्स के 27 वें पायदान पर था. आज वह 27वें से गिरकर 53 वें स्थान पर जा गिरा है. अब आगे क्या होगा?
देश के मानवाधिकार आयोग(NHRC) में अब जस्टिस (रिटा) अरुण मिश्रा साहब आ रहे हैं. आयोग की अब वह अध्यक्षता करेंगे. मिश्रा साहब किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. उनके कई न्यायिक फैसलों और कतिपय बयानों को लेकर सामाजिक राजनीतिक और यहां तक कि न्यायिक हलकों में कितनी और कैसी चर्चा होती रही, यह बताने की जरुरत नहीं है. हमारी सरकार ने उन्हें इस पद के लिए सर्वथा योग्य पाया.
पूरी दुनिया के लोकतंत्रवादी, यहां तक कि बेहद प्रतिष्ठित संस्थाएं और इंटरनेशनल मीडिया मंच भी मानते हैं कि बीते कुछ वर्षो से भारत में मानवाधिकार की स्थिति और दयनीय हो गयी है. Global Press Freedom Index और Democracy Index भी इसके गवाह हैं.
आज के दौर में जिस तरह सत्ता और सत्ताधारियो से असहमत लोगों के मानवाधिकारों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है, उसमें भारत की लोकतांत्रिक प्रतिष्ठा का यह पतन अवश्यंभावी था. अचरज की बात है कि उसे संभालने की कोई कोशिश नहीं दिख रही है. इसके उलट, अपनी लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थाओं को और कमजोर किया जा रहा है.

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